बक्सर को अयोध्या–काशी की तर्ज पर विकसित करने और सनातन धर्म की प्राचीन विरासत को संरक्षित करने की मांग अब राष्ट्रीय स्तर पर गूंजने लगी है।

विश्वामित्र सेना के लगातार प्रयासों का असर यह हुआ कि बक्सर के समग्र विकास का मुद्दा राज्यसभा तक पहुंच गया।

विश्वामित्र सेना के राष्ट्रीय संयोजक श्री राजकुमार चौबे लंबे समय से “सनातन जोड़ो यात्रा”, गंगा आरती, रामनवमी पर हेलीकॉप्टर से पुष्पवर्षा तथा जिला व राजधानी पटना में आयोजित प्रेस वार्ताओं के माध्यम से बक्सर के ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व को उजागर करते रहे हैं। उनके इन प्रयासों ने सत्ता और विपक्ष—दोनों का ध्यान बक्सर की ओर आकर्षित किया है।

बजट सत्र के दौरान राज्यसभा में चर्चा के क्रम में माननीय सांसद मानन कुमार ने केंद्र सरकार का ध्यान बिहार के बक्सर जिले में स्थित ऐतिहासिक एवं पौराणिक तीर्थ स्थलों और क्षेत्र के समग्र विकास की ओर आकृष्ट किया। उन्होंने कहा कि बक्सर प्राचीन काल से धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। यहां रामरेखा घाट, सिद्धाश्रम, वामन अवतार स्थल, वामलेश्वर मंदिर, नाथबाबा मंदिर, ब्रह्मणेश्वर स्थान मंदिर सहित अनेक तीर्थ स्थल हैं, जिनका उल्लेख धार्मिक ग्रंथों और ऐतिहासिक स्रोतों में मिलता है।
सांसद ने कहा कि अयोध्या, काशी, उज्जैन और द्वारका की तरह बक्सर में भी एक प्रमुख धार्मिक केंद्र बनने की पूर्ण क्षमता है, किंतु अब तक यहां आधारभूत संरचना, धार्मिक पर्यटन, आवागमन, स्वच्छता और श्रद्धालुओं की सुविधाओं के लिए व्यापक व्यवस्था नहीं की गई है। उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि बक्सर में पर्यटन आधारित विकास, सड़क एवं परिवहन व्यवस्था, रोजगार सृजन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए ठोस योजनाएं लागू की जाएं।
सांसद द्वारा उठाए गए ये मुद्दे वही हैं, जिन्हें विश्वामित्र सेना समय-समय पर प्रमुखता से उठाती रही है—कि बक्सर का समुचित विकास होने से न केवल धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे और अर्थव्यवस्था सुदृढ़ होगी।
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए विश्वामित्र सेना के राष्ट्रीय संयोजक श्री राजकुमार चौबे ने कहा कि यह बक्सर के लिए सकारात्मक संकेत है। उन्होंने विश्वास जताया कि जल्द ही यह गूंज विकास के रूप में बक्सर तक पहुंचेगी। उन्होंने दोहराया कि जब तक बक्सर की पहचान अयोध्या और काशी की तरह स्थापित नहीं हो जाती, तब तक संगठन अपने संकल्पों के साथ निरंतर प्रयास करता

