सोनबरसा में पूर्व सैनिक दुर्योधन प्रसाद की प्रतिमा का अनावरण, शौर्य और संस्कार का बना प्रेरणास्रोत।

बक्सर (सोनबरसा), 19 फरवरी 2026।राष्ट्र सेवा को समर्पित जीवन की अमिट स्मृतियों को सहेजते हुए गुरुवार को सोनबरसा गांव में स्वर्गीय पूर्व सैनिक दुर्योधन प्रसाद की भव्य प्रतिमा का अनावरण गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ।

पूरे समारोह में देशभक्ति, सम्मान और भावनाओं का अद्भुत संगम देखने को मिला।

कार्यक्रम का आयोजन स्वर्गीय दुर्योधन प्रसाद के पुत्र हवलदार श्रीप्रकाश बाबू (भारतीय सेना) एवं आलोक बाबू के नेतृत्व में किया गया। प्रतिमा का विधिवत अनावरण उनकी धर्मपत्नी श्रीमती सुनीता देवी ने रिबन काटकर किया। इसके उपरांत बिहार राज्य पूर्व सैनिक संघ के बक्सर जिला अध्यक्ष राम नाथ सिंह ने मंत्रोच्चार एवं जयघोष के बीच प्रतिमा का आवरण हटाकर उसे समाज को समर्पित किया।

अनावरण के बाद उपस्थित पूर्व सैनिकों एवं ग्रामीणों ने प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। पूरा क्षेत्र “भारत माता की जय” और “वंदे मातरम्” के नारों से गुंजायमान रहा। देशभक्ति गीतों की प्रस्तुति ने माहौल को ओजस्वी बना दिया।

कार्यक्रम की शुरुआत में आयोजक श्रीप्रकाश बाबू ने संघ के पदाधिकारियों एवं अतिथियों का फूल-माला और अंगवस्त्र देकर स्वागत किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में पूर्व सैनिक, स्थानीय गणमान्य नागरिक एवं ग्रामीण उपस्थित रहे।

मीडिया से बातचीत के दौरान स्वर्गीय दुर्योधन प्रसाद की पत्नी और पुत्र अपने संस्मरण साझा करते हुए भावुक हो उठे। उन्होंने कहा कि यह प्रतिमा उनके जीवन-संघर्ष और देशभक्ति की भावना को सदैव जीवित रखेगी। उनके भावुक क्षणों ने उपस्थित जनसमूह की आंखें भी नम कर दीं।

जिला अध्यक्ष राम नाथ सिंह ने अपने संबोधन में कहा, “यह प्रतिमा केवल एक सैनिक का सम्मान नहीं, बल्कि समाज के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है। यह हमें राष्ट्र और माता-पिता के प्रति अपने कर्तव्यों की याद दिलाती रहेगी।”

समारोह में सूबेदार मेजर हरिशंकर सिंह (सेना मेडल), सूबेदार मेजर जितेंद्र सिंह, नायब सूबेदार मिथिलेश यादव, नायब सूबेदार राजबली सिंह, कैप्टन राजीव रंजन तिवारी, सूबेदार मेजर राजेंद्र प्रसाद सहित अनेक पूर्व सैनिकों ने भाग लिया और स्वर्गीय प्रसाद को श्रद्धांजलि अर्पित की।

कार्यक्रम का संचालन एवं समन्वय मीडिया सेल, बिहार राज्य पूर्व सैनिक संघ, बक्सर द्वारा किया गया।

सोनबरसा में आयोजित यह समारोह न केवल एक सैनिक के सम्मान का प्रतीक बना, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्रभक्ति और कर्तव्यपरायणता का संदेश भी दे गया।

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