बक्सर। सदर प्रखंड के गोसाईंपुर ग्राम में सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का शुभारंभ भव्य कलश यात्रा एवं जलभरी शोभायात्रा के साथ हुआ।

पहले दिन निकाली गई शोभायात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। बैंड-बाजे के साथ निकली यात्रा में महिलाओं ने सिर पर कलश रखकर मंगलारंभ किया। भजन-कीर्तन और भगवान के जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।
कथा के प्रथम दिवस पर मामाजी के कृपापात्र आचार्य श्री रणधीर ओझा ने श्रीमद्भागवत महापुराण की महिमा का विस्तृत वर्णन करते हुए कहा कि भागवत का मूल उद्देश्य जीव को ईश्वर से जोड़कर उसके जीवन में दिव्यता का संचार करना है। उन्होंने कहा कि भागवत केवल एक ग्रंथ नहीं, बल्कि भगवान का साक्षात स्वरूप है और इसका श्रवण करना ईश्वर से साक्षात्कार का माध्यम है।
आचार्य श्री ने ‘सत्संग’ के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ‘सत्’ अर्थात सत्य, परमात्मा और सद्गुणों के साथ संग ही वास्तविक सत्संग है। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल संतों के समीप बैठना ही सत्संग नहीं, बल्कि मन, वचन और कर्म से भगवान की भावना में जुड़ जाना ही सच्चा सत्संग है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे गंदे वस्त्र जल से धुलकर निर्मल हो जाते हैं, वैसे ही सत्संग से मन के विकार दूर होकर आत्मा शुद्ध होती है। सत्संग व्यक्ति के संस्कारों में सकारात्मक परिवर्तन लाता है और उसे भक्ति, सेवा तथा अध्यात्म की ओर अग्रसर करता है।
आचार्य श्री ने यह भी कहा कि सत्संग केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि जीवन दृष्टि को बदलने की शक्ति है। भगवान के चरित्र और भक्तों के जीवन से प्रेरणा लेकर व्यक्ति अपने कर्मों को सुधार सकता है तथा मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त कर सकता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि कथा को सुनकर उसे अपने दैनिक जीवन में उतारें, तभी उसका वास्तविक लाभ मिलेगा।
आयोजक बबन उपाध्याय ने बताया कि श्रीमद्भागवत कथा 25 फरवरी तक प्रतिदिन अपराह्न 3:30 बजे से संध्या 7:00 बजे तक आयोजित की जाएगी। कथा को लेकर गांव में उत्साह और श्रद्धा का माहौल बना हुआ है।

