Bihar Times News | बक्सर
22 फरवरी 2006 की शाम लगभग साढ़े सात बजे बक्सर शहर के पुलिस चौकी नंबर एक के समीप घटी एक घटना ने पूरे शहर को झकझोर दिया।

चर्चित व्यक्ति शशि यादव की हत्या की खबर फैलते ही बक्सर में आक्रोश की लहर दौड़ पड़ी। देखते ही देखते सदर अस्पताल परिसर में हजारों की भीड़ उमड़ पड़ी।

माहौल इतना उग्र हो गया कि अस्पताल में तोड़फोड़ शुरू हो गई और हालात बिगड़ते देख अस्पतालकर्मी अपनी जान बचाकर वहां से हट गए।

पूरी रात हल्की ठंड के बीच पुलिस चौकी के सामने शव रखकर परिजन और समर्थक धरने पर बैठे रहे। अलाव जलाकर न्याय की मांग की जाती रही। मीडिया कर्मियों की भारी भीड़ भी मौके पर डटी रही।

घटना की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि तत्कालीन विधायक हृदयनारायण सिंह स्वयं पूरी रात धरने पर मौजूद रहे। बताया जाता है कि शशि यादव ने उन्हें विधायक बनाने में अहम भूमिका निभाई थी, जिससे दोनों के बीच गहरा विश्वास था।

सुबह होते ही भड़का जनाक्रोश
23 फरवरी की सुबह तक आक्रोश ने उग्र रूप ले लिया। बक्सर शहर के कई हिस्सों में भीड़ सड़कों पर उतर आई और कई स्थानों पर तोड़फोड़ व हंगामा हुआ।

एमवी कॉलेज के परीक्षा केंद्र पर कॉपियां फाड़ दी गईं और परीक्षार्थियों ने परीक्षा का बहिष्कार किया।
एमपी हाई स्कूल की प्रयोगशाला में तोड़फोड़ की गई।
अलका सिनेमा हॉल में आग लगाने का प्रयास हुआ।
कृष्णा सिनेमा, दुर्गा टॉकीज और कुंवर विजय सिनेमा में चल रहे शो बंद करा दिए गए।
सड़कों पर अधिकारियों को खदेड़ा गया और मारपीट की घटनाएं सामने आईं।
जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक की गाड़ियों तक को नुकसान पहुंचाया गया।

उस समय बक्सर के जिलाधिकारी रशीद अहमद खान और पुलिस अधीक्षक विनोद कुमार सहित एडीएम राजेश कृष्ण सिन्हा एवं एसडीएम किशोरी साव पदस्थापित थे। हालात इतने बेकाबू हो गए कि प्रशासन पूरी तरह दबाव में आ गया।

दोपहर लगभग एक बजे पटना से बिहार के एडीजी और राज्य सरकार के प्रतिनिधि बक्सर पहुंचे। आसपास के जिलों से अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया। अधिकारियों ने धरने पर बैठे विधायक हृदयनारायण सिंह, शशि यादव के पिता और भाई को समझाकर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजने पर सहमति बनाई।

वरिष्ठ अधिकारी तब तक बक्सर में डटे रहे, जब तक स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हो गई। देर शाम चरित्रवन स्थित श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार के बाद शहर में धीरे-धीरे शांति बहाल हुई।

बक्सर के इतिहास का काला अध्याय
शशि यादव हत्याकांड केवल एक आपराधिक घटना नहीं थी, बल्कि वह दिन बक्सर के इतिहास में काले अक्षरों में दर्ज हो गया।

एक व्यक्ति की हत्या ने पूरे शहर को हिंसा और अराजकता की आग में झोंक दिया। प्रशासनिक व्यवस्था, जनभावना और राजनीतिक समीकरण—सभी इस घटना से हिल गए थे।

20वीं बरसी पर यह घटना आज भी बक्सर की स्मृतियों में ताजा है—एक ऐसी रात, जब शहर ने आक्रोश, असहायता और उथल-पुथल का भयावह चेहरा देखा था।

